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बंगलोर

रविवार, अक्टूबर 21, 2018
मुखिया का नाम                        पुत्र                           गोत्र                उम्र                      जन्मतिथि          
श्री संतोष कुमार                            श्री रामसिंह             .........            37                        ...........    
 शिक्षा                                       व्यवसाय                                 मोबाइल नंबर 
M.B.A.                                       Job                                 +91-8928299043
पता-  #29E shantiniketan layout Bangalore 
नाम                         संबंध -  पिता/पति का नाम          उम्र        जन्मतिथि          शिक्षा                व्यवसाय 

श्रीमती सोना                  w/o-   श्रीसंतोष कुमार            34         23/11/1984     Msc, B.ed           ग्रहणी 
दक्षजीत सिंह                  s/o-    श्रीसंतोष कुमार             6          11/01/2012    studying
भूविषा कुमारी                 D/o-   श्रीसंतोष कुमार             2           02/12/2016

अमरावती

रविवार, अक्टूबर 21, 2018
मुखिया का नाम                        पुत्र                           गोत्र                उम्र                      जन्मतिथि          
श्री रामदास                           श्री बाबूलाल                   नोटावाले          62                         ...........    
 शिक्षा                                       व्यवसाय                                 मोबाइल नंबर 
M.A. बी.एड़                                 शिक्षक                             +91-8928299043
पता-  Flat No. 022 Borode Apartment Near H.V.P.M Gaurakshan Chowk Amravati (M.H.)- 444605
नाम                         संबंध -  पिता/पति का नाम          उम्र        जन्मतिथि          शिक्षा                व्यवसाय 

श्रीमती आशा                  w/o-   श्रीरामदास                  58          04/11/1963      10th                     ग्रहणी 
सुमित                            s/o-    श्रीरामदास                 29           04/11/1989      BE(Comp)            जॉब 

अध्यात्म क्या है ?

रविवार, अक्टूबर 21, 2018

अध्यात्म का अर्थ है अपने भीतर के चेतन तत्व को जानना,मनना और दर्शन करना अर्थात अपने आप के बारे में जानना या आत्मप्रज्ञ होना |गीता के आठवें अध्याय में अपने स्वरुप अर्थात जीवात्मा को अध्यात्म कहा गया है | "परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते "|
आत्मा परमात्मा का अंश है यह तो सर्विविदित है | जब इस सम्बन्ध में शंका या संशय,अविश्वास की स्थिति अधिक क्रियमान होती है तभी हमारी दूरी बढती जाती है और हम विभिन्न रूपों से अपने को सफल बनाने का निरर्थक प्रयास करते रहते हैं जिसका परिणाम नाकारात्मक ही होता है |
ये तो असंभव सा जान पड़ता है-मिटटी के बर्तन मिटटी से अलग पहचान बनाने की कोशिश करें तो कोई क्या कहे ? यह विषय विचारणीय है |
अध्यात्म की अनुभूति सभी प्राणियों में सामान रूप से निरंतर होती रहती है । 
0;्वयं की खोज तो सभी कर रहे हैं,परोक्ष व अपरोक्ष रूप से |
परमात्मा के असीम प्रेम की एक बूँद मानव में पायी जाती है जिसके कारण हम उनसे संयुक्त होते हैं किन्तु कुछ समय बाद इसका लोप हो जाता है और हम निराश हो जाते हैं,सांसारिक बन्धनों में आनंद ढूंढते ही रह जाते हैं परन्तु क्षणिक ही ख़ुशी पाते हैं |
जब हम क्षणिक संबंधों,क्षणिक वस्तुओं को अपना जान कर उससे आनंद मनाते हैं,जब की हर पल साथ रहने वाला शरीर भी हमें अपना ही गुलाम बना देता है | हमारी इन्द्रियां अपने आप से अलग कर देती है यह इतनी सूक्ष्मता से करती है - हमें महसूस भी नहीं होता की हमने यह काम किया है ?
जब हमें सत्य की समझ आती है तो जीवन का अंतिम पड़ाव आ जाता है व पश्चात्ताप के सिवाय कुछ हाथ नहीं लग पाता | ऐसी स्थिति का हमें पहले ही ज्ञान हो जाए तो शायद हम अपने जीवन में पूर्ण आनंद की अनुभूति के अधिकारी बन सकते हैं |हमारा इहलोक तथा परलोक भी सुधर सकता है |
अब प्रश्न उठता है की यह ज्ञान क्या हम अभी प्राप्त कर सकते हैं ? हाँ ! हम अभी जान सकते हैं की अंत समय में किसकी स्मृति होगी, हमारा भाव क्या होगा ? हम फिर अपने भाव में अपेक्षित सुधार कर सकेंगे | गीता के आठवें अध्याय श्लोक संख्या आठ में भी बताया गया है
यंयंवापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् |
तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भाव भावितः ||
अर्थात-"हे कुंतीपुत्र अर्जुन ! यह मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है,  उस-उस को ही प्राप्त होता है ;क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहता है |"
एक संत ने इसे बताते हुए कहा था की सभी अपनी अपनी आखें बंद कर यह स्मरण करें की सुबह अपनी आखें खोलने से पहले हमारी जो चेतना सर्वप्रथम जगती है उस क्षण हमें किसका स्मरण होता है ? बस उसी का स्मरण अंत समय में भी होगा | अगर किसी को भगवान् के अतिरिक्त किसी अन्य चीज़ का स्मरण होता है तो अभी से वे अपने को सुधार लें और निश्चित कर लें की हमारी आँखें खुलने से पहले हम अपने चेतन मन में भगवान् का ही स्मरण करेंगे |बस हमारा काम बन जाएगा नहीं तो हम जीती बाज़ी भी हार जायेंगे |


कदाचित अगर किसी की बीमारी के कारण या अन्य कारण से बेहोशी की अवस्था में मृत्यु हो जाती है तो दीनबंधु भगवान् उसके नित्य प्रति किये गए इस छोटे से प्रयास को ध्यान में रखकर उन्हें स्मरण करेंगे और उनका उद्धार हो जाएगा क्योंकि परमात्मा परम दयालु हैं जो हमारे छोटे से छोटे प्रयास से द्रवीभूत हो जाते हैं |
ये विचार मानव-मात्र के कल्याण के लिए समर्पित है |

सत्यम शिवम् सुन्दरम

अहंकार (EGO) क्या है ?

शुक्रवार, अक्टूबर 19, 2018


"अहंकार (EGO) :
"श्री देवकीनंदन शान्त ' , महासचिव, बुन्देलखण्ड सहयोग परिषद्, लखनऊ" द्वारा  प्रस्तुत कथन के अनुसार :


एक या डेढ़ वर्ष तक के बालक में नैसर्गिकता विद्यमान रहती है तब तक उनमें किसी भी प्रकार का अहंकार (EGO) नाम का तत्व नहीं होता जैसे कि अन्य जानवरों, पशु-पक्षियों इत्यादि में। जैसे-जैसे बालक बड़ा होता - जाता है, प्रकृति द्वारा मनुष्य में निहित तत्वों के अंतर्गत अहंकार(EGO)स्वत: विकास के क्रम में पैदा हो जाता है। प्रारम्भ Functional(कार्यात्मक) EGO से होता है जो Fixnal EGO में Finally convert हो जाता है।
'Ego is a virtue which gives anybody a seperate identity(अहंकार एक गुण है जो किसी को एक अलग पहचान देता है ) !' 
यह एक 'Undual Philosophy' है जिसे 'अद्वैत'कहकर इस प्रकार समझाने का प्रयास किया गया है कि We have to accept our Functionality till we become only ONE i.e, ONENESS covers our personality as a whole !(हमें अपनी कार्यक्षमता को स्वीकार करना होगा जब तक हम केवल एक ही बन जाते हैं, एकता पूरी तरह से हमारे व्यक्तित्व को शामिल करती है)
There r two type of EGOs :  
 1) Un-Enlightened EGO (अनजान अहंकार)& 
2) Enlightened Ego ( प्रबुध्य अहंकार )
किसी भी व्यक्ति को जब तक यह ग्यात रहता है कि वह दूसरों से क्यों कर अलग है ? ऐसा Un-Enlightened व्यक्ति किसी भी समय  Enlightened हो सकता है।बस वह Do-Er नहीं है,यह सच्चाई ग्यात होते ही।
यह अहंकार भी एक तत्व है , ऊर्जा है जिसे किसी भी सूरत से नष्ट किया ही नहीं जा सकता।हाँ, इसका ध्यान के अभ्यास द्वारा इसे हम रूपान्तरित करके ऐसा सन्तुलन स्थापित कर सकते हैं कि हम यह पूरी तरह जान लेते हैं कि हमारे द्वारा कोई है जो कार्य करवा रहा है,बस !
बुद्ध ने इसी को निर्वाण कह दिया।
संसार अथवा सन्यासी जैसी कोई बात नहीं है,यह सिद्धार्थ ने सन्यास लेने के बाद समझा।
"यूँ तो होते हैं समन्दर में क़तरे ही क़तरे सब ; क़तरा वही है कि जिसमें समन्दर दिखाई दे !!" -'नूर'
हम परमात्मा से अलग ही कहाँ हुए ? यह बात जानते हुए भी जो Un-Enlightened हैं ,उन्हें अपने आपको कर्ता मानना छोड़ना होगा,यही Seeker का उद्देश्य पूरा होगा।
जिस क्षण यह छोटी सी 'सूक्ष्म' लगने वाली बात समझ में आ जाएगी, EGO सन्तुलन बना लेगा,रूपान्तरित हो जाएगा,प्रसन्नता घेर कर बैठ जाएगी।"
श्री अनन्त श्री के अष्टमी (नव-रात्र) में दिए गये प्रवचन का सार ।१८.१०.१८

"सरल भाषा मे समझे तो अहंकारी व्यक्ति की आस्था उन तत्वों पर टिकी होती है जिनका अस्तित्व तात्कालिक और क्षणभंगुर है। ऐसा व्यक्ति सदैव अपनी आर्थिक क्षमता, सम्पदा, सामाजिक प्रतिष्ठा व आडम्बर को ही अपनी जीवन शैली बना लेता है। अहंकारी को लगता है कि उसके जैसा इस संसार में कोई नहीं है, केवल वही है जो सर्वश्रेष्ठ है। यही मूलभूत अंतर है आत्मविश्वास और अहंकार के वास्तविक अस्तित्व में।"


प्रश्न: Ego ( अहंकार)  एक व्यक्ति विचार करता है कि उसके अंदर अहंकार नहीं है , तो इसके क्या लक्षण होते  कि वह समझ सके कि उसके अंदर अहंकार है या नहीं? श्री गंगा प्रसाद दुलारया नागपुर 
उत्तर : यही इसका प्रमाण है कि उसका विचार करना ही ये बताता है कि वह सबसे अलग दिखना चाहता है- यही तो अहंकार या EGO का सर्वप्रथम लक्षण है। विनम्र दिखना और विनम्र होने में बड़ा बारीक फ़र्क़ है।जो विनम्र होता है उसे इस बात की चिन्ता ही नहीं रहती कि कोई उसकी विनम्रता की ओर देखे भी ! इसी प्रकार अहंकार रहित व्यक्ति ये विचार ही नहीं करता कि वह समझे कि उसमें EGO की मात्रा अभी भी बची है क्या ? जिस क्षण ऐसे विचार उभरते हैं सावधानी की ज़रूरत है कि हम सहज, सरल और सादगी से भरे रहें - यही सबसे बड़ा लक्षण है जो हमारी छोटी सी बुद्धि में जन्मा है। शेष आपके सर्वाधिक नज़दीक जो भी गुरुवर या सद्गुरु हों वे अधिक प्रकाश डाल पाएँगे।" सादर -'शान्त',लखनऊ।



कहानी : अहंकारी व्यापारी और बुद्ध

एक बार मगध के व्यापारी को व्यापार में बहुत लाभ हुआ, अपार धन-संपत्ति पाकर उसका मन अहंकार से भर गया। उसके बाद से वह अपने अधीनस्थों से अहंकारपूर्ण व्यवहार करने लगा।व्यापारी का अहंकार इतना प्रबल था कि उसको देखते हुए उसके परिवार वाले भी अहंकार के वशीभूत हो गए। किंतु जब सभी के अहंकार आपस में टकराने लगे तो घर का वातावरण नरक की तरह हो गया।
वह व्यापारी दुःखी होकर एक दिन भगवान बुद्ध के पास पहुंचा और याचना करके बोला - भगवन्! मुझे इस नरक से मुक्ति दिलाइए। मैं भी भिक्षु बनना चाहता हूं।
भगवान बुद्ध ने गंभीर स्वर में कहा- अभी तुम्हारे भिक्षु बनने का समय नहीं आया है। 
बुद्ध ने कहा- भिक्षु को पलायनवादी नहीं होना चाहिए। जैसे व्यवहार की अपेक्षा तुम दूसरों से करते हो, स्वयं भी दूसरों के प्रति वैसा ही व्यवहार करो। ऐसा करने से तुम्हारा घर मंदिर बन जाएगा।
घर जाकर उस व्यापारी ने भगवान बुद्ध की सीख को अपनाया और घर का वातावरण स्वतः बदल गया। अब सब अपने-अपने अहंकार को भूलकर एक-दूसरे के साथ प्रेम से रहने लगे। शीघ्र ही घर के दूषित वातावरण में नया उल्लास छा गया। 

सीख : कभी भी अपने अहं के घमंड में दूसरों के साथ ऐसा व्यवहार न करो, जो तुम्हें स्वयं के लिए पसंद न हो। 

नागपुर

शुक्रवार, सितंबर 28, 2018

मुखिया का नाम                        पुत्र                           गोत्र                उम्र                      जन्मतिथि          
श्री मोहनलाल                     श्री सुकलाल                     धुरवइया           88                      ...........    
 शिक्षा                                       व्यवसाय                                 मोबाइल नंबर 
5th                                         ...........                                  9890739152
पता-  प्लाट नं 296 न्यु नंदनवन ले आउट ,  " श्री कृष्ण कुंज " आनंद पैलेस नं 3 के पीछे  नागपुर  - 440009
नाम                         संबंध -  पिता/पति का नाम          उम्र              शिक्षा                व्यवसाय 

श्रीमती कमलाबाई            w/o-   श्रीरामस्वरूप              63                7th                     ग्रहणी 
ओमप्रकाश (लापता)         s/o-    श्रीरामस्वरूप              46               10th                   ..............
श्रीमती शोभा                   w/o -   ओमप्रकाश                45               12th                    ग्रहणी 
कु. नीशा                         d/o-    ओमप्रकाश                 24               सी.ए.                   ...........
कु. बृंदा                           d/o-    ओमप्रकाश                 19               आर्किटेक            अध्ययनरत 
राजेंद्र                              s/o -  श्रीरामस्वरूप                44               12th                  ज्वेलरी दुकान
श्रीमती रश्मि                    w/o-   राजेंद्र                         41               12th                 ग्रहणी     
गौरव                               s/o-  राजेंद्र                          20              सिविल आर्किटेक   अध्ययनरत
आदित्य                         s/o-  राजेंद्र                          18              BCCA                अध्ययनरत
चंद्रप्रकाश                       s/o -  श्रीरामस्वरूप               42               10th                 ज्वेलरी दुकान
श्रीमती वंदना                     w/o-  चंद्रप्रकाश                 36               12th                ग्रहणी 
शाश्वत                          s/o-  चंद्रप्रकाश                  18               BBA               अध्ययनरत
 कु.साक्षी                          d/o-  चंद्रप्रकाश                  12               7th                 अध्ययनरत
गंगाप्रसाद                      s/o-  मोहनलाल                 59              7th                  ज्वेलरी दुकान
श्रीमती सुमित्रा                  w/o- गंगाप्रसाद                     56              10th                ग्रहणी 
कौशल                           s/o- गंगाप्रसाद                   30             एम.बी.ए.         टूर एंड ट्रेवल्स 
श्रीमती दर्शनी                   w/o- कौशल                          30              बी.आइ.डी          इंटीरियल डिज़ाइनर 
वेदान्त                            s/o- कौशल                           5               KG 1st               अध्यनरत
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मुखिया का नाम                        पुत्र                           गोत्र                उम्र                      जन्मतिथि          
श्री देविदास लचुरया           श्री लक्ष्मीप्रसाद                  बांगर                50                       ...........    
 शिक्षा                                       व्यवसाय                                 मोबाइल नंबर 
12th                                 फ़ैन्सि लेस ड्रेस मटेरियल            wp-9021319437, call-8999957419
पता-  670-Durga sadan, C.A. Road behind Preetam hotal, Gandhibag Nagpur - 440009
नाम                         संबंध -  पिता/पति का नाम          उम्र        जन्मतिथि                    शिक्षा                व्यवसाय 

श्रीमती उषा                     w/o-   श्रीदेविदास                  47           21/01/1971             12th                     ग्रहणी 
नीलेश                            s/o-   श्रीदेविदास                   26           29/10/1992         BBA,MBA           Bussiness 
कु. निधि                        d/o -  श्रीदेविदास                   18           25/03/2000            B.Arch             अध्ययनरत 
सक्षम                            s/o-    श्रीदेविदास                  11           14/04/2007              4th                 अध्ययनरत  
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Maindwara

सोमवार, सितंबर 24, 2018

मुखिया का नाम                        पुत्र                           गोत्र                उम्र                      जन्मतिथि          
श्री गनेशी लाल                   श्री सुल्ले                       दुलारया             68                         ...........    
 शिक्षा                                       व्यवसाय                                 मोबाइल नंबर 
हाइ स्कूल                                  कृषि                        08085192660, 09755081778
पता- vill.- Maindwara, post- syawani, tehsil- Lidhora, Distt- Tikamgarh(m.p)- 472331
नाम                         संबंध -  पिता/पति का नाम          उम्र          जन्मतिथि     शिक्षा                व्यवसाय 

श्रीमति रामकली            w/o-   गनेशीलाल                    65              ...........         5th                     ग्रहणी 
सुरेन्द्र कुमार                  s/o-    गनेशीलाल                    41               ..........        बीएड                दूकानदारी
श्रीमती हेमलता              w/o -  सुरेन्द्र कुमार                 35              ...........       बीएड          सरकारी शिक्षक  
कु. प्रतीक्षा                      d/o-    सुरेन्द्र कुमार                13             ............         9th               अध्ययनरत 
कु. प्रगति                       d/o-    सुरेन्द्र कुमार                10             ............          7th               अध्ययनरत 
वैभव                              s/o -  सुरेन्द्र कुमार                 3               ............           ...                   
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मुखिया का नाम                        पुत्र                           गोत्र                उम्र                      जन्मतिथि          
श्री भगवत प्रसाद                   श्री सुल्ले                     दुलारया           63                         ...........    
 शिक्षा                                       व्यवसाय                                 मोबाइल नंबर 
हाइ स्कूल                                  कृषि                                      09755326514 
पता- vill.- Maindwara, post- syawani, tehsil- Lidhora, Distt- Tikamgarh(m.p)- 472331
नाम                         संबंध -  पिता/पति का नाम          उम्र          जन्मतिथि     शिक्षा                व्यवसाय 

श्रीमति कमला               w/o-   भगवत प्रसाद              60              ...........         5th                     ग्रहणी 
शैलेंद्र कुमार                   s/o-    भगवत प्रसाद              35               ..........         12th                दूकानदारी
श्रीमती वंदना                w/o -  शैलेंद्र कुमार                 33               ...........        12th                  ग्रहणी   
अभिनय                        s/o-   शैलेंद्र कुमार                  8                 ............         4th               अध्ययनरत 
महक                            d/o-    शैलेंद्र कुमार                 7             11/11/2011       3th               अध्ययनरत 
             
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राजपूत छीपा समाज गोत्रावली

सोमवार, सितंबर 24, 2018
प्रचलित गोत्र                                                        शुद्ध गोत्र 

1. आलेकर (अलया)                                            बरोलया
2. बजना वाले                                                     बरौलया 
3. बन्दैया                                                            बानल
4. भसनेईय                                                        
5. चुरारया
6. चोखटया
7. छतपुरिया                                                      सीलोनिया 
8. दुलारया                                                         धुरवइया 
9. धुवकरया 
10. इटैलया
11. गरोठया                                                 चतौरया 
12. गरोलया 
13. घटोरिया 
14. घुरेटया 
15. हीरापुरिया                                                 नकोले 
16. जतारिया                                                    तैंतील 
17. कुटरिया                                                    मुरारया / नागर
18. कुरेंचया 
19. लचुरया                                                      बांगर 
20. मंगरौरया                                                  पिपरैया 
21. मलैया 
23. मायावाले                                                   मयवा वाले 
24. मोदी                                                         काशिव/कश्यप 
25. मथनया                                                     
26.  नोटा वाले                                                 रसगइया
27. नारायण पुरिया                                          हरकन पुरिया 
28. पुरा वाले                                              
29. पड़वइया                                                   सरगइया 
30. पवार 
31. रोहला                                                       रोहला 
31. सदावर्ती ढ्या
32. शीला वाले 
33. सरगइया 
34. टुड़या    
35. वैध 
 
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